History, geography,arts and culture and facts about Riva( Madhya Pradesh)

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 नमस्कार दोस्तो स्वागत आप सभी का हमारी इस website the knowledge spectrum मे आज की हमारी ब्लोग पोस्ट बहुत ही मजेदार होने वाली है। क्योंकि इस ब्लॉग पोस्ट मे हम जानगे मध्य प्रदेश के एक मशहूर जिले के बारे मे। 

इस पोस्ट को मजेदार बनाने के लिए रीवा(मध्यप्रदेश)को कर्ता( subject) के तौर पर वक्ता के रूप मे पेश किया गया है तो चलिए जानते है रीवा के बारे मे..... 

                         सामान्य परिचय



मैं रीवा बोल रहा हूँ, वह नगर जो अपने ऐतिहासिक वैभव, सांस्कृतिक धरोहर और प्राकर्तिक सुन्दर्ता के लिए प्रसिद्ध है।

मेरी धरती पर महान राजाओं, संतों और योद्धाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

आज मैं आपको अपने रीवा की अद्भुति यात्रा पर लेकर जाने वाला हूँ, जहां आप जानेंगे मेरे गौरवशाली इतिहास, धार्मिक स्थलों और प्राकर्तिक सुन्दर्य के बारे में।

हमारी ब्लोग पोस्ट की शुरुवात करते हुए सबसे पहले रीवा की कुल देवी माता काली की जय जयकार करना चाहता हूँ, क्योंकि उन्हीं की कृपा से मैं आज अपने इस रूप में हूँ, तो चलिए जय माता दे लिखकर ब्लोग की शुरुवात करते हैं।

मेरे साथ रिवा की यात्रा की शुरुवात करने से पहले कमेंट करके बताईए कि आपको अगली पोस्ट किस स्थान, किस जिले और किस मंदिर पर देखनी है ताकि हम आपके पसंदिदा विषय पर ब्लोग बना सकें। 


1.रामायण काल:-

रामायन काल में मेरा यह क्षेत्र विंध्य पर्वत का हिस्सा माना जाता था। यहां की पहाडियों और नदियों में आज भी रामायण काल की गाधाएं सुनाई देती हैं।

कहा जाता है कि भगवान राम ने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था यहां के वन प्रांतर

रिशी मुनियों की तपो भूमी मानी जाती है जहां उन्होंने अपनी साधना और तपस्या कि।

2.महाभारत काल:- 

अब मैं आपको महाभारत काल के मेरे गौरव शाली अतीत के यात्रा पर लेकर चलता हूँ महाभारत काल में मेरा रिवा क्षेत्र चेदी राज्य का हिस्सा था चेदी के राजा शिशुपाल का इस शेत्र पर प्रभाव था और उनका उलेख महाभारत के विभिन प्रसंगों में मिलता है

यह भूमी महाभारत के युद्ध में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले राजाओं की थी यहां की लोक कथाएं

इस भूमी के प्राचीन गौरव की साक्षी है 


3.महाभारत काल के बाद का इतिहास:-


महाभारत काल के बाद आता है इतिहास जो आप नहीं जानते छठी श्ताबदी में सबसे पहले कल्चूरी वन्श ने मेरे क्षेत्र में अपनी जड़े जमाई प्रारंभ में यह राजवन्श छोटी- छोटी रियासतों में बंटा हुआ था लेकिन धीरे धीरे उन्होंने मेरा(रीवा) इस रिवा क्षेत्र और मध्य भारत के एक बड़े हिस्से पर ऑऑअपना अधिकार स्थापित कर लिया 


4.नौवीं शताब्दी:- 

नौवीं शताब्दी कल्चूरी शासकों का प्रभाव बढ़ता गया

और उन्होंने क्षेत्र में कई किलों और मंदिरों का निर्मान करवाया मेरी भूमी पर बने कलिंजर का किला और त्रिपुरी का किला कल्चूरी शासनकाल की महत्वपूर्ण स्थापत्य कृतियां हैं जो आज भी उनके गौरव को दर्शाती हैं

5.बारवी शताब्दी:-

बारवी शताब्दी धीरे धीरे कल्चूरी वंश का प्रभाव कम होने लगा और अन्य राज वंशों ने मेरे क्षेत्र में अपनी पकड मजबूत करने आरंभ कर दी 


5.चंदेल वंश का साम्राज्य :-

कल्चूरी वंश के कमजोर होने के बाद दस वि सताब्दी में चंदेल वंश ने अपने सामराज्य का विस्तार किया और मेरे क्षेत्र पर शासन करना आरंभ किया चंदेल शासकों ने बेतवा और केन नदियों के क्षेत्र में अपनी सत्ता स्थापित की जिसमें रिवा भी शामिल था ग्यारवी श्ताबदी इस समय चंदेल वन्श का शासनकाल अपने सिखर पर था

खजुराहो और कलिंजर जैसे प्रसिद्ध मंदिर और किले उनके शासनकाल की शानदार स्थापत्य कृतिया है

हाला कि खजुराहों मेरे शेत्र के पास स्थित नहीं है लेकिन चंदेलों के प्रभाव ने रिवा की संस्कृतिक और धार्मिक उन्नति को काफी बढ़ावा दिया 


6.बघेल वंश का शासन काल:-

तेरवि शताब्दी चंदेल वंश का प्रभाव धीरे धीरे कम होने लगा और बघेल वंश ने मेरी भूमी में अपनी पकड मजबूत करनी आरम्भ कर दी।

चोदवी शताब्दी बघेल वंश ने रीवा पर अपना अधिकार स्थापित किया इस समय बघेलों ने मेरी भूमी में अपनी राजधानी स्थापित की और रीवा को अपने साम्राज्य का केंद्र बनाया इस काल में मेरा रिवा तेजी से एक उन्नत नगर के रूप में विकसित हुआ और ये शक्तिशाली बघेल वंश का शासन मेरे इस विशाल क्षेत्र पर अठारवी शताब्दी तक चला । मुगल काल के दोरान मुझ पर भी मुगलों ने आक्रमण किये जबकि बघेल राजाओं ने अपनी कुशल रणनीती से मुगलों का सामना किया उनके प्राकरम के कारण मैंने अपनी स्वतंतरता और अपना अस्तित्व बनाए रखा । 


7.अंग्रेजी शासन का प्रभाव:- 

फिर वो दौर आया जब समुचे भारत क्षेत्र की तरह मेरे क्षेत्र को भी अंग्रेजों के अधीन होना पड़ा उन्नसवी  शताब्दी में ब्रिटिश शासन के अधीन मैं एक रियासत के रूप में अस्तित्व में रहा बगेल वन्श के शासकों ने अंग्रेजों के साथ सहयोग किया और मेरे क्षेत्र में विकास कार्य जारी रखे। 

8.स्वतंत्रता प्राप्ती के बाद:-

मेरी धरती ने स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण भूमीका निभाई और 1947 में आजादी मिलने के बाद मेरा रीवा राज्य भारत संग में विलह हो गया और मुझे मध्य प्रदेश राज्य का हिस्सा बना दिया गया 


9.रीवा नाम का रहस्य:-

अब मैं आपको बताता हूँ कि मेरे क्षेत्र का नाम रीवा कैसे पड़ा। रीवा नाम की उत्पत्ति रीवा शब्द से हुई है जिसका संस्कृत में अर्थ है बहती हुई धारा या नदी। ऐसा माना जाता है रीवा नगर का नाम नर्मदा नदी की सहायक नदियों और यहां बहने वाली अन्य जल धाराओं के कारण पड़ा। इन नदियों के प्रवाह की सुंदरता और पवित्रता ने क्षेत्र को रीवा नाम दिया जो समय के साथ मेरी पहचान बन गया। 


10.रीवा की लोकेशन:-

अब आपको बता दूं आप मुझ तक कैसे पहुंच सकते हैं

अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहें तो मेरा निकटम हवाई अड्डा खजुराहो एरपोर्ट मुझ से 130 किलोमेटर दूर छतरपुर सतना रोड से जुड़ा है। जिसके अलावा जबलपुर हवाई अड्डे से सतना 215 किलोमेटर दूर है।

यदि आप रेल्वे लाइन से आना चाहो तो रीवा का रेल्वे स्टेशन भारत के सभी प्रमुख नगरों से रेल के माध्यम से जुड़ा है।

रीवा से कई स्टेट हाइवे और नेशनल हाइवे गुजरते हैं जो देश के कई महा नगरों को जुड़ते हैं

अन्य शहरों से बसे रीवा शहर में आती है शहर से होकर जाने वाले राजमार्ग NH7, NH27, NH35 और NH75 है।

सतना बस स्टेंड शहर के केंद्र में स्थित है जहां रीवा, पन्ना, चतरपुर के लिए बस हर समय उपलब्ध रहती है और स्थानिय स्थलों, चित्रकूट, मेहर, बिरसिंगपुर, नागोद, रामवन के लिए आटो रिक्षा और टेक्सी की सुविधा उपलब्ध है। 


11.रीवा का खान-पान:-

आप रीवा आओ और मेरे यहां के मशूर व्यंजनों का स्वाद न चका ये तो हो ही नहीं सकता और ये आपकी जीवन परियंत मेमरी में रहने वाला है मेरे यहां लोग चाव से खाते हैं

अब आपको मेरे यहां के मशूर खाने के बारे में बताता हूँ

इंद्रहार ये एक हलका नास्ता है आपने किसी ने किसी रूप में दाल या कड़ी का स्वाद चका होगा अब उन दोनों को मिलाने और आपको इंद्रहार देने के लिए भारत के मध्य प्रदेश के दिल पर भरोसा करें और अगर आप सोच रहे हैं इसे इंद्रहार क्यों कहा जाता है तो इसके पीछे का एक कारण है क्योंकि यह एक ऐसा व्यंजन है जिसे भगवान इंद्र को समर्पित किया जाता है

रसाज की कड़ी बगेल खंड की पारंपरिक व्यंजन है 


चने की दाल से बनी रसाज की कड़ी बगेल खंड का बहुत ही मशहूर व्यंजन है। रसाज की कड़ी को हो सकता है आपने पहले कभी चक ही न हो। लेकिन आपने  एक बार इसका स्वाद चक लिया तो आप इसे बार बार खाना चाहेंगे।

वही मेरे यहाँ के स्थानीय निवासी वड़े और आलूवड़े, मालपुआ, आलूपराठा, कचोरी, चना घुगनी और लापसी भी बड़े चाव से खाते हैं। और इसे खाकर आप भी आनन्दित महसूस करेंगे। 

12.रिवा की आधुनिक सुन्दरता :-

आधुनिक काल में रिवा एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक केंद्र बन चुका है। यहां की प्राकर्तिक सुन्दरता जैसे की केविटी जल प्रपात, पूर्वा जलप्रपात और रीवा का किला पर्यटको को अपनी और आकर्षित करते है 

मेरी सीमाएं उत्तर मे सतना जिले तक और दक्षिण मे सिध्दी जिले तक पूर्व मे मिर्जापुर(उत्तर प्रदेश) तक और पश्चिम में शहडोल जिले तक फैली हुई हैं। 

मेरा क्षेत्रफल 6,240 वर्ग किलोमेटर में फैला है और मेरी जनसंख्या लगभग 25 लाख है। मेरे इस विशाल रिवा जिले को 6 बलॉक्स में डिवाइड किया हुआ है। जिसमें नौ नगरपालिका के क्षेत्र आते है। 571 ग्राम पंचायत मिलकर कुल  1649 गांवो की देखरेख करती है 


13.धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के बारे:-

मेरे रीवा के धार्मिक और पर्यटन क्षेत्र के बारे में जानकर एक बार तो आप भी चोंक ही जाएंगे। तो आईए मैं आपको एक-एक जगह के बारे में बताता हूँ।

1. रिवा का किला:-

रिवा का किला बगहेल राजाओं की वीरता और पराक्रम का प्रतीक है। यह किला अठार वि शताब्दी में बनाया गया था और इसमें बघेल वंश के राजाओं के बारे में कई ऐतिहासिक साक्ष्य मिलते हैं इस किले के अंदर कई संग्रहालय हैं जहां बघेल वंश की धरोहर को देख सकते हैं 

2.केवटी जल प्रपात :-

केवटी जलप्रपात एक सुंदर और प्राकृतिक जलप्रपात है जो रिवा से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह स्थान प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है यहां की शीतल धारा और हरियाली मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है 


3. पूर्वा जलप्रपात:-

रीवा का पूर्वा जलप्रपात एक और आकर्षक स्थल है जो विंध्याचल पर्वत से गिरने वाली अपनी ही धारा के लिए प्रसिद्ध है यहां पर पानी लगभग 70 मीटर की ऊंचाई से गिरता है और यह दृश्य बड़ा ही अद्भुत होता है जिसको देखकर मन में भी लहरें उठने लगती हैं 

4.गोविंदगढ़ किला और जलाशय :-

गोविंदगढ़ किला रीवा के निकट ही स्थित है और इसे मिनी कश्मीर के नाम से जाना जाता है यह किला बघेल वंश के शासको द्वारा बनवाया गया था किले के पास स्थित जलाशय इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है 

5.वाइट टाइगर सफारी :-

यह सफारी भारत का पहला वाइट टाइगर सफारी है यहां पर आप दुर्लभ सफेद बाघों को देख सकते हैं इसे 2016 में पर्यटकों के लिए खोला गया था और यह रीवा के प्रमुख आकर्षणों में से एक है 

6.रानी तालाब :-

रानी तालाब रीवा शहर के मध्य में स्थित एक पवित्र जलाशय है कहा जाता है कि तालाब रानी विशेष पूजा और स्नान के लिए बनाया गया था यहां पर कई श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठान के लिए आते हैं 


7.बैकुंठपुर किला:-

बैकुंठपुर किला बघेल वंश द्वारा 16वीं शताब्दी में बनाया गया एक ऐतिहासिक किला है जिसकी वास्तुकला अद्भुत और यहां से पूरे रीवा का सुंदर दृश्य दिखता है 

8.रानी दुर्गावती संग्रहालय:-

रीवा की सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित है जिसमें प्राचीन मूर्तियां चित्र कला और ऐतिहासिक कलाकृतियां देखने को मिलती हैं 


9.चचाई जलप्रपात:-

130 मीटर ऊंचा विंध्याचल पर्वत श्रंखला में स्थित एक अद्भुत प्राकृतिक स्थल है यह अपने सुंदर दृश्य और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है मेरे इस विशाल रीवा में कई स्थान हैं जिनके बारे में एक ही पोस्ट में बताना असंभव सा लगता है 

आशा है आप मेरे द्वारा बताई गई मेरी(रीवा) आत्मकथा का यह वीडियो आपको अवश्य पसंद आया होगा अब कमेंट करके यह बताइए अगली पोस्ट किस विषय पर देखना चाहते हैं जिस विषय के सबसे ज्यादा कमेंट होंगे हम उस पर अगली पोस्ट जल्द ही लाएंगे जल्द ही मिलते हैं अगली पोस्ट के साथ तब तक के लिए नमस्कार।

जय हिंद जय भारत धन्यवाद

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